टाइम स्टैंपिंग / Time Stamping

टाइम स्टैंपिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें किसी दस्तावेज़ के निर्माण और संशोधन समय को सुरक्षित रूप से ट्रैक किया जाता है। इस प्रकार प्रदान किया गया स्टैंप Trusted Time Stamp कहा जाता है। इसमें सुरक्षा का अर्थ यह है कि समय रिकॉर्ड होने के बाद किसी भी व्यक्ति द्वारा दस्तावेज़ को बदलना संभव नहीं है। डिजिटल सिग्नेचर या कोड सिग्नेचर के साथ एक trusted time stamp जोड़ने से उस डेटा, दस्तावेज़ या कोड की विश्वसनीयता बढ़ती है, साथ ही यह भी बताता है कि लेनदेन किस सही तिथि और समय पर हुआ।

किसी दस्तावेज़ या कोड को कब हस्ताक्षरित किया गया, यह बताने के लिए एक trusted time stamping authority का उपयोग किया जाता है।

टाइम स्टैंप के बिना लगाए गए सिग्नेचर, आधार प्रमाणपत्र के साथ समाप्त हो जाते हैं। लेकिन यदि सिग्नेचर के समय पर time stamp लगाया जाता है, तो उस प्रमाणपत्र के समाप्त होने के बाद भी सिग्नेचर मान्य रहता है। trusted time stamp वाला दस्तावेज़ या कोड प्राप्तकर्ता यह जाँच सकता है कि यह कब हस्ताक्षरित हुआ, और यह भी सत्यापित कर सकता है कि time stamp में उल्लिखित तिथि/समय के बाद दस्तावेज़ या कोड में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। time stamp को दस्तावेज़ के लिए अलग से या सिग्नेचर के साथ भी प्राप्त किया जा सकता है। यदि सिग्नेचर के दौरान time stamping authority निर्दिष्ट है, तो सिग्नेचर time stamping authority को भेजा जाता है। वे उस सिग्नेचर के साथ समय, तिथि और अपने हस्ताक्षर को जोड़कर भेजते हैं। यह पूर्ण सिग्नेचर दस्तावेज़ के साथ जोड़कर एक समग्र हस्ताक्षरित दस्तावेज़ बनाता है।

टाइम स्टैंपिंग प्रक्रिया / Time Stamping Process

भारत में Indian Standard Time (IST) के लिए आधिकारिक समय सेवा राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला द्वारा प्रबंधित की जाती है। भारत में कार्यरत सभी प्रमाणपत्र और टाइम स्टैंपिंग प्राधिकरणों पर यह अनिवार्य है कि वे अपने आधिकारिक समय सर्वर का समय इस समय सर्वर के साथ समन्वित रखें।

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