सिमेट्रिक-की क्रिप्टोग्राफी
- सिमेट्रिक-की क्रिप्टोग्राफी को सीक्रेट-की क्रिप्टोग्राफी भी कहते हैं।
- एन्क्रिप्शन और डिक्रिप्शन के लिए एक ही कुंजी का उपयोग किया जाता है।
- यह मुख्य रूप से गोपनीयता (Confidentiality) की सुविधा देता है।
- सामान्यतः एन्क्रिप्शन/डिक्रिप्शन तेज़ी से होता है।
- कुंजी प्रबंधन थोड़ा कठिन होता है।
- यदि सीक्रेट कुंजी लीक हो जाए, तो कोई भी उसे उपयोग करके संदेश को डिक्रिप्ट कर सकता है। इसलिए सभी उपयोगकर्ता को कुंजी को सुरक्षित रखना पड़ता है।
असिमेट्रिक-की क्रिप्टोग्राफी
- असिमेट्रिक-की क्रिप्टोग्राफी को पब्लिक-की क्रिप्टोग्राफी भी कहते हैं।
- एन्क्रिप्शन के लिए एक कुंजी और डिक्रिप्शन के लिए दूसरी कुंजी का उपयोग किया जाता है।
- यह गोपनीयता और प्रामाणिकता (Authentication/Integrity) दोनों प्रदान करता है।
- एन्क्रिप्शन/डिक्रिप्शन थोड़ा धीमा होता है।
- कुंजी प्रबंधन बहुत जटिल होता है।
- किसी एक कुंजी से एन्क्रिप्ट किया गया संदेश केवल संबंधित दूसरी कुंजी से ही डिक्रिप्ट किया जा सकता है।
- केवल निजी कुंजी लीक होने पर ही कोई भी उससे संदेश डिक्रिप्ट कर सकता है। इसलिए निजी कुंजी के मालिक को इसे बहुत सुरक्षित रखना पड़ता है।